Friday, February 14, 2014

देश के समक्ष चुनोतिया और  भारतीय राजनीती 

 आज हिंदुस्तान के समक्ष हजारो चुनोतिया है  जिनसे निपटना इस देश के लिए अवश्यम्भावी है  . 
 जाती वाद ,क्षेत्रवाद ,साम्प्रदायिकता ,कश्मीर समस्या ,चीन का बार बार भारतीय सीमा में घुसना ,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार।  और ऐसी ही हजारो समस्या है जिनसे निपटना इस देश के लिए चुनौती बन रही है 
एक छोटी सी घटना सांप्रदायिक दंगो में बदल जाती है।  मुझहफर कि घटना ने जंहा पुरे देश को झकझोर के रख दिया वंही कश्मीर में सेना के जवानो  का पाकिस्तानी सेना के द्वारा सर काटना और फिर हमारे गृह मंत्री का बयान। 
मित्रो  में आज मुख्या रूप से कश्मीर समस्या पे बात करना चाहता हूँ।  देश कि आजादी के बाद रियासतो के एकीकरण का काम मुख्यरूप से सरदार बलभ भाई पटेल को दिया गया और उन्होंने बहुत ही चतुराई से लगभग सभी रियासतो को साम दाम दंड भेद से हिंदुस्तान में विलय कर लिया।  पर जो आज कि प्रमुख समस्या  है कश्मीर समस्या उसके विलय का काम स्वयं प. जवाहर लाल नेहरू ने अपने हाथ में लिया। और इसी एक रियासत को आज समस्या के रूप में देश को तोहफा दे गए।  और दुबारा गलती यह कि कि इसी संयुक्त राष्ट्र में ले गए।  और मित्रो गलतियों का पिटारा यंही खत्म  होने वाला नहीं और कश्मीर को धारा 370 के अंतर्गत विशेष सुविधा इस प्रकार कि दी कि वो देश में होते हुए भि……… . कश्मीर ही एक ऐसा राज्य है जंहा दो झंडे दो संविधान बनाये गए।  मित्रो इसी धरा 370 के अनुसार हम कोई भी वंहा कोई जमीन नहीं खरीद सकते। एक प्रकार से देश से अलग सा ही मामला हो गया। .... और तो और इस राज्य में कश्मीरी पंडितो को मार मार के भगाया गया है।  दोस्तों आज इस देश को सबसे ज्यादा जरुरत है धरा 370 को हटाकर कश्मीर को दी जेन वाली सभी विशेष सुविधा हटा ली जाये। . या फिर सेना को और भी ज्यादा अधिकार दिए जाये और जो भी आँख इस देश कि तरफ बुरी नजर से देखे उन आँखों को नोच ले। ज़ो नापाक हाथ बढे उन हाथो को जड़ मूल से नष्ट कर दे। … जरुरत है एक मजबूत इच्छा शक्ति कि राजनीती कि मजबूत नेतृत्व कि। … और यह नेतृत्व अभी तो यही लगता है कि नरेंद्र मोदी ही दे सकते है 

Thursday, January 13, 2011

कश्मीर के भारत का ताज नहीं मस्तक है

में कई दिनों से देश के सभी प्रमुख न्यूज चेनलो को बहुत गहराई से देख रहा था की बीजेपी के अलावा कोई और भी है क्या जो कश्मीर के मुख्यमंत्री जनाब उम्र अब्दुला के बयान की निंदा करे । पर दुर्भाग्य मेरा कहे या इस देश का की न तो कोई अरुंधती राय आगे आई और नाही इस देश की सबसे बड़ी पार्टी और सरकार की तरफ से कोई वक्तव्य आया की कश्मीर के मुख्यमंत्री को अपना बयान वापिस लेना चाहिए और कश्मीर के लाल चोक पे तिरंगा फहराने वालो का स्वागत करना चाहिए । यह बहुत ही नानिदानिया है की कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है यह बात सभी कहते है पर लाल चौक पे तिरंगा फहराने की बात पे सब अपनी दम को पीछे दबा कर कुत्तो की तरह भाग जाते है । सबसे पहले तो में एक बात को स्पष्ट करना चाहूँगा की कश्मीर भारत का मुकुट नहीं मस्तक है अगर कश्मीर को भारत से अलग करने के कुत्सित प्रयास किये जाते है तो इसका मतलब सीधा और साफ़ है की हमसे हमारा मस्तक काट के अलग करने का प्रयत्न किये जा रहे है । अगर मुकुट चला जाता है तो फिर भी इंसान जिन्दा रह सकता है अगर सर काट दिया जाये तो जिन्दा नहीं रह सकता । भारत से कश्मीर अलग होने का मतलब है इस देश की हत्या । लेकिन जब तक देश में राष्ट्रवादी ताकते जिन्दा है कश्मीर को भी ताकत भारत से अलग नहीं कर सकती ॥ आज देश में आतंकवादी ताकते राज कर रही है जो अंग्रेजो से और मुगलों से भी खतरनाक है जो इस देश की गरीब जनता का पैसा खेलो के नाम पर घोटाले ,२ जी स्पेक्ट्रम घोटाला ,आदर्श घोटाला ,यह घोटालो में डूबी सरकार को इस देश और जनता की नहीं अपने युवराज की चिंता ज्यादा है की जैसे तैसे इस देश के सांप्रदायिक एकता के ताने बाने को तोडा जाये और मुस्लिम वोटो को हिन्दू आंतकवाद के नाम पर कांग्रेस के वोटो की तरफ लाया जाये । दोस्तों जब जब कमजोर नेतृत्व आया है देश को कई दसक पीछे ले गया है और आज तो पूरा सिस्टम ही कमजोर और फटी जेब वाला है । मेरे को एक लाइन याद आगई की "बर्बादे गुलिस्ता करने को एक उल्लू ही काफी है पर यंहा तो हर दल पे उलू बेठे है ।

Saturday, October 23, 2010

हिन्दू आंतकवाद या कश्मीर जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने का षड़यंत्र

जो लोग सदियों से हिंसा के खिलाफ रहे है । तथा अंहिंसा के पुजारी है । क्या वो धर्म के नाम से आंतकवाद फैला सकते है । मुझे नहीं लगता की यह हो सकता है हिन्दू हमेसा से सहिष्णु और विश्व बन्धुत्वा की भावना के साथ ही पैदा होता है । वो कभी आंतकवादी नहीं होता । कांग्रेस पार्टी के युवराज जो मन ही मन में इस देश के प्रधानमंत्री बनाने का खवाब पाले बेठे है और इस देश के मुस्लिमो को अपना सबसे बड़ा वोते बैंक बनाने के लिए अपने भाषण में बोल बेठे की संघ और सिमी दोनों एक तरह के संघठन है । उसके दुसरे दिन ही भरता के गृह मंत्रालय का बयां आता है की संघ और सिमी दोनों की विचारधार एक जैसी नहीं हो सकती । संघ अखंड भारत के निर्माण की पवित्र विचार के साथ काम करता है । जबकि सिमी भारत विभाजन जैसे कुत्सित विचार के साथ काम करता है ॥ पर इसमे राहुल जैसे मदमस्त नेता की कोई गलती नहीं है क्योंकि उसके दिमाग में तो बस एक ही विचार है की जैसे तैसे मुस्लिम वोट कांग्रेस के साथ हो जाये ॥ और राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के नेतृत्वा में काम कर रही भारत की सी बी आई और इन्ही के एक महत्वपूर्ण और ख़ास आदमी हमारे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्वा में काम कर रही ऐ टी एस ने एक नया सगुफा छोड़ा है हिन्दू आंतकवाद .... संघ के प्रचारको को निशाना बनाना और मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए हिन्दू आंतकवाद के नाम से संघ के प्रचारको को आंतकवादी घोषित करना । अभी अजमेर धमाको की चार्ज शीट में संघ के एक ऐसे व्यक्ति का नाम लिया है जिसकी कोई कल्पना ही नहीं कर सकता .... और हाँ उस व्यक्ति ने राष्ट्रवादी मुस्लिमो के लिए एक मंच भी बना रखा है ..जिसमे हिन्दू और मुस्लिम लोग मिलाकर राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए काम करते है ... इस व्यक्ति का नाम है इन्द्रेश जी ... ऐसे देवता स्वरुप इंसान का नामइस में घसीट कर निश्चित रूप से पुरे राष्ट्रवादी भारतीय समाज को ही बदनाम करने का प्रयत्न किया जा रहा है । और हाँ इनका नाम आने के साथ ही राजस्थान के गृह मंत्री ने ठीक अपने लोगो के विपरीत कहा की लश्कर ऐ तोयबा कुछ लालची हिन्दुओ को लालच देकर अपने साथ मिला रही है । तो इन बातो से यह तो साफ़ होता है की ऐसे कार्यो में आर एस एस का होना नामुमकिन है । या यूँ कहे की संघ का नाम इन कार्यो में घसीटने के पीछे हिंदुस्तान के सबसे महत्वपूर्ण अंग कश्मीर की तरफ से ध्यान हटाना तो नहीं या अराष्ट्र वादी ताकतों की मसीहा सोनिया गाँधी अपना कोई छिपा हुआ एजेंडा तो लागू नहीं कर रही है। आज कश्मीर जल रहा है । कश्मीर का मुख्यमंत्री कहता है की कश्मीर का भारत में विलय नहीं हुआ । में कहता हूँ की यह सब हिन्दू लोगो को और राष्ट्रवादी ताकतों को कमजोर करके कश्मीर मुद्दे से लोगो का ध्यान हटाना है । दोस्तों यह एक प्रकार से मजाक सा लगता है की जिस संघठन का उद्देश्य अखंड भारत का निर्माण कर के भारत माता को परम वैभव पर पहुँचाना हो । और वो हर रोज यह प्रार्थना करते है की भारत विश्व गुरु के सिंघासन पर फिर से विराजमान हो । उसके बारे में ऐसे आरोप लगाना निश्चित रूप से कंही न कंही एक बड़ी साजिश की बू आती है । और कश्मीर को भारत से अलग करने का को षडयन्त्र लगता है । जय हिंद वन्दे मातरम

Thursday, February 4, 2010

उत्तर भारतीय बनाम बांग्लादेसी

महाराष्ट्र की राजनीति में आज कल एक नया सगुफा छिड़ा हुआ है की मराठी मानुस का सबसे बड़ा हितेसी कोन है । और महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टिया इस काम को बहुत ही आचे तरीके से निभा रही है । पर यह पार्टिया भूल रही है की मराठी मानुस के नाम से यह लोग भारत की एकता और अखंडता को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा रहे है । मराठी मानुस के नाम पर यह अपने ही भाइयो को मार काट रहे है । अगर राज ठाकरे और इनके चाचा को अगर मराठी मानुस का भला ही करना है तो निकालो न बांग्लादेसी घुस पेठियो को जो आये दिन महाराष्ट्र में , मुंबई में कभी क्या समस्या पैदा करते है कभी विष्फोट करते है कभी किसी का अपहरण करते है कहने का मतलब है सारे काम देश को नुकसान पहुँचाने वाले करते है । राज भैया इस देश को और आपके और हमारे प्यारे महाराष्ट्र को किसी भी उत्तर भारतीय से नुकसान नहीं होगा । राज ठाकरे के देखा देखी शिव सेना भी अपना मराठी वोट बैंक को खिसकता देखकर मराठी मानुस के भलाई का ढिंढोरा पीटने लगी । देखा जाये तो महाराष्ट्र के स्थानीय कानून पहले स ही इतने सख्त है की उनमे महाराष्ट्र के अलावा और कंही का मानुस फिट ही नहीं होता । पर कांग्रेस को महाराष्ट्र में शिव सेना को कमजोर करना था तो इसे यह मोका स्वयं शिव सेना ने ही दे दिया और राज के रूप में कांग्रेस को अपना एक मजबूत एजेंट मिल गया । क्योंकि कोंग्रेस तो उत्तर भरियो की खिलाफत कर नहीं सकती क्योंकि वो तो एक राष्ट्रीय पार्टी है । अगर वो ऐसा कुछ करेगी तो उसे पुरे हिंदुस्तान में नुकसान होगा ...... हाय मेरे देश की राजनैतिक पार्टिया ..... जिन्हें देश प्रेम से ज्यादा वोट का प्रेम है । राज ने अगर इसे बंग्लादेसियो को निकालने का आन्दोलन बनाते तो देश का प्रत्येक युवा उनको अपना रोल मॉडल मानता और हर आदमी यह सोचता की हाँ यह आदमी इस देश का प्रधान मंत्री बने तो देश का भला हो सकता है । पर सस्ते वोट बैंक को प्राप्त करने के चकर में यही रास्ता ठीक लगा । में अब भी कहता हूँ की महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों से कोई नुकसान नहीं होगा हाँ यह अब भी कहता हूँ की अगर कोई नुकसान होगा तो बंग्लादेसियो से होगा .... जो लगता है की अभी तो बांग्लादेसी बनाम उत्तर भारतीये में लगता है की अभी तो बांग्लादेसी भारी है ..... पर जब तक हिन्दुस्तान में संघ की शक्ति है ऐसे कृत्या संघ कभी नहीं होने देगा । और सही समय पर संघ ने अपने स्वयं सेवको से उत्तर भरियो की रक्षा करने का आदेस देकर एक बार संघ ने अपनी सामाजिक सरोकार की भूमिका निभाई ॥ जय हिंद

Wednesday, February 3, 2010

उत्तर भारतीय बनाम बंगलादेशी

महाराष्ट्र में आजकल हर पार्टी ने मराठी मानूस का राग अलापने में अपने आपको सबसे बड़ा साबित करने में लगी है । और लगता है महाराष्ट्र हिंदुस्तान से भी बड़ा हो गया महारष्ट्र के नेताओं ने मराठी मानुस के नाम से अपने ही भारतीये भाइयो को प्रताड़ित करने में लगी है । और इस काम को सबसे ज्यादा अंजाम दे रहे है कांग्रेस के एजेंट के रूप से काम कर रहे महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे और उनके गुर्गे और उनके इस राग में सुर से सुर मिलाना अपनी मजबूरी समझ रही है शिव सेना , और इनका मूक दर्शक बन कर साथ दे रही है कांग्रेस । इन पागल लोगो को समझाया जाये की मुंबई में पहले से जितने कानून है उन सब में मुंबई के अलावा और कोई कंही का आदमी फिट ही नहीं हो सकता । पहले से ही महाराष्ट्र के सभी कानून मराठियों के हिसाब से उन्ही को सुविधा देने के लिए बनया गया है । राज अगर वास्तव में ही अपने आपको मराठी मानूस का हितेषी बताता है या है तो महाराष्ट्र को उत्तर भारतीयों से कोई खतरा नहीं है और नहीं उत्तर भारतीय कभी वंहा कोई विष्फोट करने वाले है । मुंबई और इस देश को बचाना है तो राज भैया महाराष्ट्र में अनगिनत बांग्लादेसी रहते है जो गेर कानूनी काम करते है महाराष्ट्र में विष्फोट करते है निकलना है तो उनको निकालो देश आपको सलाम करेगा । आपका यह मराठी मानूस का राग जो जो आप अलाप रहे हो कृपया करके बंद करो इसे यह तो अपने ही भाइयो को मारने वाला और इस देश को राज्यों के नाम से तोड़ने वाला कदम है । पर राज को तो सिर्फ वोटो से मतलब है और कांग्रेस इस बात को अच्छी तरह से जानती है । सिव सेना का वोट बैंक अगर तोडा जा सकता है तो मराठी मानुस के नाम से ही तोडा जा सकता है इस लिए कांग्रेस ने अपने अगेंट के रूप में राज ठाकरे को खड़ा किया क्योंकि ऐसा कांग्रेस तो कर नहीं सकती क्योंकि वो तो एक राष्ट्रीय पार्टी है ऐसा करने से उसे हिंदुस्तान के हर राज्य में नुक्सान हो सकता है । में फिर कहना चाहता हूँ की कृपया करके आपस में लड़ने का काम बंद करो इन बंग्लाद्सी घुस्पेथियो को निकालो वरना न तो मराठी मानुस रहेगा और नहीं कोई उतर या दक्षिण भारतीय रहेगा ...... और इस संकट काल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का बयान स्वागत योग्य है । जय हिंद ....... राज्यों की आपस में जय बोलेंगे तो नुक्सान होगा हिंदुस्तान की कीमत पर राज्य के हितो को छोड़ना होगा । किसी ने कहा है की अगर पूरी दुनिया को बचाने के लिया एक देश एक देश को बचने के लिए एक राज्य और एक राज्य को बचने के लिए एक जिले और जिले को बचने के लिए एक गाँव की बलि दे जा सकती है । आज हमें किसी की बलि देने की आवश्यकता नहीं है हमें आवश्यकता है तो बस इतनी की इस देश के सामने जो बंगलादेशी घुसपेठ की समस्या है उसे निजात दिलाने के लिए किसी न किसी राज्य को आगे आना होगा। भारत माता की जय .

Saturday, January 30, 2010

कांग्रेस में युवा नैतृत्व या अनुकम्पा नियुक्तिया

हिंदुस्तान की राजनीति में आज कल एक नया सगुफा चाल रहा है । और कांग्रेस पार्टी ने इस काम को अंजाम देने के लिए अपने ४० वर्षीय युवराज यानि की राहुल गाँधी को बाग़ डोर दे रखी है । आज कांग्रेस या अन्य पार्टियों की युवा ब्रिगेड पर नजर डालते है ... । सबसे पहले बात करते है राहुल गाँधी की यह स्व श्री राजीव गाँधी के पुत्र है तथा इनकी माता श्री मति सोनिया गाँधी है , इनकी दादी श्री मति इन्दिरा गाँधी है... । अब इनकी ही टीम के कुछ और अन्य नेताओं की बात करते है .... सचिन पायलेट पुत्र स्व.श्री राजेश पायलेट , ज्योतिरादित्य सिंधिया पुत्र स्व.श्री माधवराव सिंधिया ,अगाथा संगमा पुत्री श्री पी ऐ संगमा (एन सी पी ),... उदहारण और भी बहुत है , कांग्रेस पार्टी और उसके सभी सहयोगी दलोंमें यह अनुकम्पा नियुक्ति का खेल युवाओ को अवसर देने के नाम पर हिंदुस्तान के यूथ को किस प्रकार कांग्रेस के वोट बैंक में बदला जाये यह कांग्रेस के नेता भली भांति जानते है । बस आज के युवा को यूथ के नाम पर सिर्फ बरगला रहे है कोंग्रेस और उनके सहयोगी दलों में या तो उन युवा नेताओं को मोका मिल रहा है जिनके माता पिता कांग्रेस के नाता रहे है और अब या तो भगवान् को प्यारे हो गए या फिर सेवानिवृत हो गए है । कांग्रेस पार्टी ने परिवार वाद को नए कलेवर में पेश किया है और दुर्भाग्य इस देश का की जनता इसे स्वीकार भी कर रही है । पर दोस्तों एक कहावत भी है की काठ की हांड़ी बार बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती वो तो सिर्फ एक बार ही चढ़ती है , बात करे भारतीय जनता पार्टी की वंहा आपको राजनीति करने के लिए किसी नाता के परिवार से होना जरुरी नहीं है वंहा तो आवश्यकता है सिर्फ इमानदारी से काम करने वाले युवा लोगो की । जिनके दिल में माँ भारती के लिए सामान हो ... भारतीय जनता पार्टी देखा जाये तो आज भी परिवारवाद के इस डांस से बची हुई है । में हिन्दुस्तान के युवा लोगो से कहना चाहता हूँ की दोस्तों अगर राजनीति करनी है और आपके परिवार के लोग पोलिटिक्स में नहीं है तो भारतीये जनता पार्टी से सही विकल्प और कोई नहीं है । आज वर्तमान युवा लोगो की इस सरकार में आम आदमी का जीना दुस्वार हो गया है महंगाई किस कदर बढ़ रही है ... चीनी ५० रु किलो देशी घी ४०० रु , आलू २० रो,किलो महंगी चीजो की लिस्ट बहुत लम्बी है यह तो उदहारण स्वरुप लिखे है। पर आपलोग कहोगे की इनसे युवा नेतृत्वा का क्या दोष यंहा भी में एक बात कहना चाहूँगा की "जिनकी न फटे बिवं वो की अजाने पीर पराई " यह सब सोने के थाली में भोजन करने वाले लोगो की सरकार है जिसमे चांदी के गिलास में पाणी पिने वाले युवराज सामिल है उन्हें क्या पता की आम आदमी किस मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालता है । जय हो कांग्रेस के युवा नेतृत्वा की जय हो

Sunday, August 2, 2009

भारतीय शिक्षा पद्दति और राष्ट्रवाद

भारत एक प्राचीन राष्ट्र है और उतनी ही समृद्ध यंहा की संस्कृति । प्राचीन काल में तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय में पुरी दुनिया के लोग अध्यन कराने आते थे । और यंहा का साहित्य भी बहुत ही समृद्ध रहा है या यूँ कहे की है भी तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी । मुग़ल आक्रमणकारियों ने सबसे पहले यंहा की सांस्कृतिक और शेक्षणिक सम्पति को नष्ट कराने का कार्य किया । कहा जाता है की मुगलों ने तक्षशिला और नालंदा विश्व विद्यालयों के पुश्ताकाल्यो को जलाया तो वो लगातार छः माह तक जलते रहे । उस समय की शिक्षा थी राष्ट्रवाद और रोजगार पर आधारित । मेरा यंहा कहने से तत्प्रिया यह नही है की उस काल में हमारे राष्ट्र के साथ क्या हुआ और क्या नही हुआ । आज में यंहा जो कहना चाह रहा हूँ वो है की आज की शिक्षा पद्दति से हमे नही तो रोजगार उपलब्ध होता है और नही राष्ट्रीय गोरव का । हमारी शिक्षा पद्दति मेकाले की शिक्षा पद्दति है । जब हम स्कूल में पढ़ते थे तो हमारे सामाजिक की किताबो में जो पाठ हुआ करते थे उनमे से एक पाठ का नाम था अकबर महान , में पूछना चाहता हूँ की उस बाल मन को हमे यह पढाना चाहिए की अकबर महान ? वो बाल मन तो अकबर को महान समझेगा और महाराणा प्रताप को दोषी । क्योंकि हम लोगों ने अकबर को महान बताया है और महान के सामने युध्ध ककरने वाला दोषी ही होगा । यह तो मेने एक छोटा सा उदहारण पेश किया है । हमारी शिक्षा पद्दति भारतीय होनी चाहिए । हमे हमारे बच्चो को अकबर की जगह महाराणा प्रताप की महानता के पाठ पढाने चाहिए जिसने अपनी जन्म भूमि और अपने लोगो के लिए राज पट छोड़ दिया और अत्याछ्री अकबर की आधीनता स्वीकार नही की और संघर्ष किया । आज की शिक्षा पद्दति हमे गुलामी के पाठ पढाती है । हमारी मानशिकता भी गुलाम लीगों की और हमे क्लेर्क बनाने वाली इस शिक्षा पद्दति को मजबूत मानशिकता के साथ हम लोगो को बदलना चाहिए ................ । तुष्टि करण को राष्ट्र हित में हम लोगो को छोड़ना ही पड़ेगा । वरना इस राष्ट्र के यह नो जवान नो जवानों की खाल में अंग्रेजो की गुलाम शिक्षा पद्दति से शिक्षित गुलाम ही इस देश के कारण धार होंगे । राष्ट्र के हित में हम सब को अपने छदम स्वार्थो की बलि देनी ही होगी ...... । । हम सब को गर्व होना चाहिए की हम महाराणा प्रताप ,शिवाजी , तात्या टोपे , सुभाष चंद्र बॉस ,भगत सिंह जैसे वीरो की इस धरती पर पैदा हुए है जिन्होंने सर तो कटा लिए लेकिन कभी सर झुकाया नही ....... ।

Saturday, July 11, 2009

आज का युवा और राजनीतिक पार्टिया

भारत की राजनीति में आजकल एक बहुत ही दमदार सगुफा चल रहा है । हर राजनीतिक पार्टी युवा नेतृत्व को आगे लाने की बात कर रहा है । इस मामले में राहुल गाँधी को आगे कर के कांग्रेस में इस सगुफे को पुरे हिन्दुस्तान में बहुत आसानी से भुना लिया और भारतीय जनता पार्टी पीछे रही । पर देखा जाए तो कांग्रेस में अपने युवा नेतृत्वा के फार्मूले की सचाई तो यह है की कांग्रेस तो एक प्रकार से अनुकम्पा नियुक्ति दे रही है । उन्ही नेता पुत्रो या पुत्रियों को आगे कर रही है जिनके माता पिता पहले से कांग्रेस या राजीनीति में थे । कोई अपनी मेहनत से जनता के बीचमें रहकर जनता के लिए काम करने वाले युवा नेताओं को आगे नही किया है । इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ज्यादा ठीक है उसमे ऐसी बात नही है कोई भी युवा कार्यकर्ता अपनी मेहनत के बलबूते पर आगे बढ़ सकता है कांग्रेस का यंगिस्तान एक प्रकार से दिखावा है और अनुकम्पा नियुक्ति है । जबकि भारतीय जनता पार्टी में निश्चित रूप से कांग्रेस से कम युवा आगे आए है पर यह सही है जो आए है वो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी मेहनत से आगे आए है । एक बात तो तय है की वास्तव में अगर युवा लोगो को इस देश में इस राज्य में नेतृत्वा करना है तो उनको भारतीय जनता पार्टी से अच्छा कोई विकल्प नही है क्योंकि कांग्रेस में नेतृत्वा कराने के लिए किसी नेता की संतान होना जरुरी है .....

Friday, July 3, 2009

समलैंगिक रिश्तो को कानूनी मान्यता ? हम भारतीये है ?

दिल्ली हाई कार्ट के द्वि सदस्यों ने कल अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में समलैंगिक रिश्तो को कानूनी मान्यता यह कहते हुए देदी की यह धारा ३७७ संविधान के अनुछेध १४ ,२१, व १५ का अतिक्रमण है । तथा व्यस्क व्यक्ति अपनी इच्छा से समलैंगिक रिश्ते रख सकता है । समलैंगिंक रिश्ते मानशिक रूप से विकृत व्यक्तियों का रोग है । और इस रोग को फैलाने की इजाजत भारतीये समाज में तो कदापि नही मिलनी चाहिए । भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विराशत है और विश्व के सभी राष्ट्र भारतीये संस्कृति से प्रेरणा लेते है । हजारो विदेशी शोधकर्ता हिंदुस्तान की इस पवन धरा भारतीये संस्कृति पर शोध करने आते है । क्या हम मानसिक रूप से विकृत पाश्चात्य सभ्यता को अपनाने जा रहे है । अगर इन संबंधो को व्यक्तिगत स्वतंत्रता मानते हुए न्यायालय ने इन संबंधो को मान्यता दी है तो फिर तो इच्छा मृत्यु को खुदखुशी को भी मान्यता देनी चाहिए क्योंकि उसमे भी व्यक्ति अपनी इच्छा से ही मौत को प्राप्त करना चाहता है । हिंदुस्तान में ऐसे फालतू और विकृत मानसिकता के पोषक काननों को मान्यता देना भी किसी आत्महत्या से कम नही है । मुरली मनोहर जोशी ने बहुत सही बात कही है "दो न्यायाधीश भारतीये संस्कृति का भाग्य निर्धारित नही कर सकते "इसी प्रकार धर्मो के नेताओं ने इस निर्णय की कड़े शब्दों में भर्तसना की है । इनमे जमा मस्जिद के इमाम ,मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ,इसाई धर्म के धर्म गुरु डोमोनिक इनामुल आदि ने ........ । में पुनः कहता हूँ की ऐसे संबंधो की हिंदुस्तान की धरा में कोई जरुरत नही है इसके लिए तो और भी सख्त कानून होना चाहिए । यह अपराध की श्रेणी में था , है और रहेगा ॥

Saturday, June 27, 2009

आज के युग में टेलीविजन की भूमिका

टेलीविजन आज हमारे रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल हो गया है । बिजली पानी खाना इसी प्रकार टेलीविजन भी आज के मनुष्य की अहम् जरुरत बन गया है । हर मध्यम वर्गीय परिवार में आज एक नही बल्कि घर में जितने कमरे है उतने ही टेलीविजन मिलेंगे । अगर देखा जाए तो यह आज के युग की एक महत्वपूरण आवश्यकता है । टेलीविजन के कारण ही आज हम कंही की भी ख़बर को घर बेठे जान सकते है । ज्ञान वर्धन के हिसाब से तो यह ठीक है और हमारा मनोरंजन भी करता है । ज्ञान वर्धन और शुद्ध मनोरंजन तक तो भूमिका ठीक है । पर शुद्ध मनोरंजन के अलावा सांस्कृतिक प्रदुषण भी टेलीविजन के जरिये हमारे घरो में पंहुच चुका है । और भारतीये समाज के ताने बाने को तोड़ने का काम सबसे ज्यादा किसी व्यक्ति विशेष ने किया है तो उसका नाम है एकता कपूर । एकता कपूर के धारावाहिकों में आप देखते है की एक ही महिला के उसी घर में चार चार बार विवाह हो जाते है । औरत के विकृत रूप को बहुत ही सुंदर साड़ी और मेक उप में उसको बहुत ही सुंदर बना कर पेश किया जाता है । और दिखाया जाता है की किस प्रकार उअरत पर सदियों से जुल्म हो रहा है और उस ज़ुल्म को इन धारावाहिकों के मध्यम से सिर्फ़ और सिर्फ़ एकता कपूर के धारावाहिक देखने वाली महिलाए ही ज़ुल्म काठीक कर सकती है । इन धारावाहिकों को देखने से एक बात तो हमारे समाज में बहुत ही मजबूती से फैली है की हमारे इस हिन्दुस्तानी समाज में नई नई शादिया बहुत टूट रही है । कोई दहेज़ के नाम पर तो कोई महिला प्रताड़ना के नाम पर । साथ ही कुछ विदेशी चॅनल भी सांस्कृतिक प्रदुषण फैलाने में कमी नही छोड़ रहे है । आज हमारे समाज को सुधारने के लिए टेलीविजन और सिनेमा के लिए कोई कठोर कानून बनाना ही चाहिए । वरना यह आग कब हमारे घरो को जला कर रख कर देगी और हमे पता ही नही चलेगा क्योंकि हम तो सास भी कभी बहु थी और कसौटी ज़िन्दगी को देखने में व्यस्त रहेंगे । ............. सोचो ......

Friday, May 15, 2009

लेफ्ट राईट है या रोंग ?

कल यानि की १६ मई को इस देश के भाग्य का परिणाम आने वाला है । जनता की अदालत अपना परिणाम तय कर चुकी है कल उस परिणाम की घोसणा हो जायेगी । सरकार भाजपा गठबंधन की बनेगी या कांग्रेस गठबंधन की बनेगी यह तय हो जाएगा । पर एक बात तय है लेफ्ट पार्टिया फिर अपने पुराने साथी कांग्रेस गठबंधन के साथ जायेगी । कहने को तो यह पार्टिया मजदूर और शोषित वर्ग की है । तथा कहते है की यह लेफ्ट पार्टिया एक निश्चित विचारधारा के अनुरूप काम करती है । पर अब इनको सत्ता का स्वाद इनकी जीभ को लग गया है । चार साल सत्ता का सुख भोगने के बाद परमाणु करार के समय यह पार्टिया यु पी ऐ गठ बंधन से अलग हो गयी थी । पर वास्तव में इनका इस गठ बंधन से दूर होने के पीछे जो वास्तविक कारण है वो है इनके क्षेत्र में इनका ख़ुद का कांग्रेस विरोधी होना । और लेफ्ट पार्टिया अपने क्षेत्र में मुख्यतया कांग्रेस के विरोध में जीत कर आती है । और अगर यह गठबंधन में रहते तो इनको सीटो का भी ताल मेल करना पड़ता और कुछ सीट इनको कांग्रेस को देनी पड़ती जो इनको स्वीकार नही होता । तो परमाणु करार इनके लिए एक अच्छा मोका था इस गठ बंधन से दूर होने का और एक अच्छे खिलाड़ी की तरह यह इस देश के लाल खिलाड़ी तुंरत अपना नाता तोड़ लिया । और अगर कांग्रेस इस बार भी अपने गठ बंधन के साथ बड़ा गठ बंधन आता है तो यह लाल झंडे के झंडा बरदार अपना सिफारशी पत्र लिए सबसे आगे मिलेंगे और कहेंगे इस देश को साम्प्रदायिक ताकतों से बचाने के लिए हम यु पी ऐ को समर्थन कर रहे है । इस देश के लोगो को यह भी ध्यान होगा की स्वार्थ सिद्ध कराने में इन लेफ्ट पार्टियों से ज्यादा बड़ा खिलाड़ी कोई नही है । १९६२ में चीन के साथ युद्घ के समय यह इस देश को सांप्रदायिक ताकतों से बचाने वाले लेफ्ट के नेता चीन के सैनिको के लिए तोरण द्वार बना कर स्वागत कराने को आतुर थे । वो तो भला हो इस देश के जांबाज सिपाहियों का जिन्होंने अपनी जान देकर भी भारत माता की लाज बचाई थी । इन लेफ्ट के नेताओं ने तो चीन को अपनी मुक्ति वाहिनी सेना बताया था । यह हमारे देश के लेफ्ट नेता और इनकी विचार धारा । बरस्सत चीन में होती है और छतरी येह तानने वाले इन लेफ्ट का न तो कोई विचार है नही कोई विचारधारा यह तो बस सता के साथ रहना जानते है । .फैसला आपका लेफ्ट राईट है या रोंग

लेफ्ट राईट है या रोंग ?

Saturday, April 18, 2009

राजनीतिक विचारधारा या स्वार्थ की राजनीति

विचारधारा नेताओं की कैसे परिवर्तित हो जाती है कहा नही जा सकता । कल तक जिस पार्टी की विचारधारा ख़राब थी आज नेतालोग उसी पार्टी की विचारधारा को अपना रहे है और कहरहे है की में इस पार्टी की विचारधरा से प्रभावित हो कर इस पार्टी में आया हूँ । कल तक जिस पार्टी की विचारधार ख़राब थी वो वो अचानक कैसे सही हो जाती है इसकाजवाब तो मेरे हिंदुस्तान के यह नेता ही दे सकते है । कुछ उदहारण है हिंदुस्तान की राष्ट्रीय राजनीति और राजस्थान की राजनीति के पर यंहा में राजस्थान के विशेष सन्दर्भ में बात कर रहा हूँ । गुजरात और उ प्र के कई उधाहरण हमारे सामने है । शंकर सिंह बाघेला ,जगदम्बिका पाल, पहले भाजपा में थे और अब कंहा है ? संजय निरुपम शिव सेना के विष्फोटक नेता उनकी भी रातो रात विचारधारा बदल गई और उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया ,संजय निरुपम के बारे में आज समाजवादी पार्टी के महासचिव और फ़िल्म स्टार संजय दत्त ने कहा की मेरे पिता यानि की सुनील दत्त संजय निरुपम के कांग्रेस में आने का सदमा बर्दास्त नही कर सके और इस दुनिया और कांग्रेस को छोड़ कर चले गए । नाफिषा अली मशहूर फ़िल्म स्टार वो भी कांग्रेस की विचारधारा को मानने वाली नेत्री थी पर उनकी विचारधारा भी रातो रात समाज वादी हो गई। कल्याणसिंह भाजपा के उ प्र के विष्फोटक नेता उनकी विचारधारा तो बहुत ही लचीली है भाजपा की विचारधारा ख़राब लगती तो पार्टी बना लेते है अच्छी लगे तो विलय और फ़िर ख़राब लगे तो समाजवादी विचारधारा ,साधू प्रसाद यादव ,राज बब्बर आदि और भी बहत नाम है जिनकी विचारधारा स्वार्थ के कारण बदल गई पर इन सब में एक नाम और लेना चाहूँगा वो नाम है सुपर स्टार अमिताभ बचन का जो की कांग्रेस की विचारधारा से प्रभावित होकर अभिनय को छोड़कर राजनीति में आए पर आज समाज वादी विचारधारा को थामे हुए है और समाज वादी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए नृत्य कर रहे है । विचार आप करे । अब हम चलते है राजस्थान की राजनीति की और । भरतपुर के नक् चढे राजपरिवार के महाराज विश्वेन्द्र सिंह जो पहले कांग्रेस के साथ थे फिर भाजपा में आए और फिर इन विधानसभा में कांग्रेस का दामन थामा पर जनता ने उनको यह अहसाश दिला दिया की राजतन्त्र कब का खत्म हो चुका है अब इस स्वतंत्र राष्ट्र में लोकतंत्र है। प्रहलाद गुंजल इनके जितना फ्लेक्सिबल नेता मेने तो नही देखा गुंजल ने भाजपा की व्यापक विचारधारा को त्याग कर अपने स्वार्थ हेतु जातिगत विचारधारा का दमन थाम लिया । गुंजल को सायद यह अहसास भी हो गया की लोकतंत्र का महल एक जाती विशेष के खंभे पर टिका हुआ नही है। किरोडी लाल मीना उनकी हालत भी अब पतली है वो अब घर के है ना घाट के । कांग्रेस के महासचिव जयसिंह राठोड ने कांग्रेस पार्टी में लोकतंत्र की हत्या के विरोध में अपनी अन्तर आत्मा की आवाज पर कांग्रेस को छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में गए और चुनाव लड़ने की घोसना भी की परन्तु रातो रात ही सायद उनकी अन्तर आत्मा बाह्य धनाढ्य कांग्रेस प्रत्यासी रफीक मंडेलिया के किसी अज्ञात कारक के आगे दब गई जिसके परिणाम स्वरुप चंद घंटो में पुनः कांग्रेस में सामिल हो गए । क्या यह राजनितिक विचार धारा है या कोई और ...................

Thursday, April 9, 2009

भारतीय राजनीति और नेताओ का दोगलापन

भारतीय राजनीति में एक बहुत बड़ी विडम्बना है नेताओ का दोगला पन। जनता के सामने कभी अपनी पार्टी की विचार धारा को श्रेष्ठ बताते है और बेचारी जनता अपने प्रिये नेता की कही हुई बातों को सास्वत सत्य मानते हुए विरोधी राजनितिक दल से बिना वजह ही घृणा कर बैठती है । लेकिन वही नेताजी जब स्वार्थ सिद्ध न होने पर विरोधी विचार धारा की पार्टी में अपना उल्लू सीधा कराने चला जाता है तो बेचारी जनता अपने आप को ठगा ठगा महशुश करती है। और देखिये नेताओं का दोगलापन अभी राजस्थान की राजनीति में एक बहुत बड़ा प्रयोग हुआ । यह प्रयोग पूर्ण रूप से उतर प्रदेश में सफल भी हुआ स्वर्ण और दलित का गठ जोढ़ यु पी में सफलता के बाद बी एस पी । ने येही प्रयोग राजस्थान में किया । बी एस पी की विरोधी विचार धारा के समाज के व्यक्तियों को बी एस पी ने टिकिट दिए और कुछ व्यक्ति विधान सभा में पहुंचे । बी एस पी के ६ विधायक जीते और अब अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए अब कांग्रेस में चले गए जबकि वही विधायक कांग्रेस के विरुद्ध जीत कर विधानसभा में पहुंचे । इससे एक बात तो यह सिद्ध होती है की चरित्र में गिरावट चरम पर है और दूसरी बात यह की भ्रष्टाचार चरम पर है । एक तरफ़ जब वरुण गाँधी आतंकवादियों के विरुद्ध कोई बात कहते है तो उसे किसी समाज या धर्म के विरोधी मान कर उस पर रा सु का लगा दिया जाता है और एक तरफ़ जब लालू प्रशाद यादव जो की एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष होने के साथ साथ केंद्रीय रेल मंत्री भी है । लालू मुस्लिम समाज का अपने आप को हितेषी बताते हुए यंहा तक कह डाला की "में अगर गृह मंत्री होता तो वरुण को बुलडोज़र से कुचलवा देता " । क्या यह एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के लिए शोभ्निये है। यह भी राजनितिक दोगलापन है ?।

Thursday, April 2, 2009

हिंदुस्तान और हिन्दी भाषा


हिंदुस्तान की भाषा क्या है । अगर कोई विदेशी ऐसा सवाल करे तो उसे जवाब देने वाला निश्चित रूप से येही कहेगा हिन्दी । किसी बच्चे से पूछा जाए की हिंदुस्तान की भाषा क्या है तो वो भी कहेगा की हिन्दी । तो मोटा मोटी एक बात समझ में आती है की हिंदुस्तान की भाषा हिन्दी है । पर वास्तव में ऐसा है नही । सदियों की गुलामी के बाद हिंदुस्तान अंग्रेजो की दासता से तो स्वतंत्र हो गया लेकिन मानसिक गुलामी से स्वतंत्र नही हो पाया । आज भी हम न्याय पालिका में जाए तो अगर कोई निर्णय होता है तो वो भी अंग्रेजी में होता है । हम किसी और विभाग में चले जाए तो वंहा भी अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता है। यह विडम्बना ही है की हम हिंदुस्तान के वासी है तथा फिर भी हमे अपनी मातृ भाषा को वह सम्मान दिलाने के लिए लगता है की एक और स्वतंत्रता संग्राम करना परेगा .

Saturday, March 28, 2009

जाति वाद और भारत का युवा

भारतीय राजनीति में आज जातिवाद चरम पर है ,हर छुटभैया नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए अपने समाज का नेता बन कर अपनी नेतागिरी चमकाने के चक्कर में समाज को तो धोखा दे रहा है साथ ही देश को बहुत बड़ा नुक्सान पहुँचा रहा है। वो दिन भी दूर नही है जिस दिन लोग जातियों के अनुसार राज्यों की मांग कर ले .इस लिए मेरा यह कहना है की हम को हर हाल में इस जाति वाद के राक्षस को रोकना ही होगा यह जहर आपस में समाज को ही नही इस देश को भी तोड़ रहे है । इस जाति वाद के जहर को रोकने के लिए सबसे ज्यादा प्रयत्न किसी के कारगर हो सकते है तो वो है उन जातियों के नेताओं के जो इस जहर को फेला रहे है । और हमारा लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ जिसको हम मीडिया के नाम से जानते है वो अपनी भूमिका इमानदारी से निभाए । और इस देश को इस समस्या से बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण और सबसे कारगर कोई हो सकता है तो वो है इस देश का युवा । और राजनितिक पार्टिया । राजनितिक पार्टियों के पास भी कोई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित के मुद्दे न होना भी इस देश में जातीय राजनीति को बढ़ावा मिल रहा है । और इस देश का आम नागरिक जबतक इन जातीय नेताओं का बहिष्कार नही करेगा तो यह समस्या और भी बढेगी । पर इस समस्या का समाधान है युवा और शिक्षा । युवा को राजनीति में आना ही होगा आज हर युवा जो कॉलेज में पढ़ रहा है वो कोई तो डॉक्टर ,एन्जिनियेर , शिक्षक , क्लर्क ,और यंहा तक की वो चपरासी भी बनने को तैयार है पर शायद ही कोई स्टुडेंट यह कईकी मेरे को राजनीति करनी है । इस काजल की कोतःरी में युवा को आना ही परेगा इस देश को जाति वाद के इस महाकाल से बचने के लिए ।

Sunday, February 15, 2009

velentines day

वेलेंतिनेस डे के ऊपर जो हो हल्ला हो रहा है यह सिर्फ़ मीडिया की उपज है हम भारतीय संस्कृति को मानने वाले और भारतीय मूल्यों के अनुसार हम अपने जीवन चरित्र को और भी ऊँचा कर सकते है। पर इस व्यापारिक युग में हर कम्पनी हर व्यापारी सिर्फ़ एक ही चीज जनता है वो है पैसा कैसे बनाये ।
और उनके इस काम को चार चाँद लगाने के लिए हमारे लोकतंत्र का एक स्तम्भ जिसको हम मीडिया कहते है उसने और भी ज्यादा कोम्मोर्सिअल बना दिया है। न्यूज़ चैनल हर न्यूज़ को इस प्रकार पेश करते।
वेलेंतिनेडे का जिस प्रकार कुछ राष्ट्रवादी लोग विरोध करते है तो उस न्यूज़ को इस प्रकार दिखाते है जैसे कोई आतंकवादी हमला हो गया है। ये सही है सबको स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है पर हम स्वतंत्रता के नाम पर हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की बलि तो नही दे सकते । इस लिए देश की सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी जरुरी है ।