Saturday, January 30, 2010
कांग्रेस में युवा नैतृत्व या अनुकम्पा नियुक्तिया
हिंदुस्तान की राजनीति में आज कल एक नया सगुफा चाल रहा है । और कांग्रेस पार्टी ने इस काम को अंजाम देने के लिए अपने ४० वर्षीय युवराज यानि की राहुल गाँधी को बाग़ डोर दे रखी है । आज कांग्रेस या अन्य पार्टियों की युवा ब्रिगेड पर नजर डालते है ... । सबसे पहले बात करते है राहुल गाँधी की यह स्व श्री राजीव गाँधी के पुत्र है तथा इनकी माता श्री मति सोनिया गाँधी है , इनकी दादी श्री मति इन्दिरा गाँधी है... । अब इनकी ही टीम के कुछ और अन्य नेताओं की बात करते है .... सचिन पायलेट पुत्र स्व.श्री राजेश पायलेट , ज्योतिरादित्य सिंधिया पुत्र स्व.श्री माधवराव सिंधिया ,अगाथा संगमा पुत्री श्री पी ऐ संगमा (एन सी पी ),... उदहारण और भी बहुत है , कांग्रेस पार्टी और उसके सभी सहयोगी दलोंमें यह अनुकम्पा नियुक्ति का खेल युवाओ को अवसर देने के नाम पर हिंदुस्तान के यूथ को किस प्रकार कांग्रेस के वोट बैंक में बदला जाये यह कांग्रेस के नेता भली भांति जानते है । बस आज के युवा को यूथ के नाम पर सिर्फ बरगला रहे है कोंग्रेस और उनके सहयोगी दलों में या तो उन युवा नेताओं को मोका मिल रहा है जिनके माता पिता कांग्रेस के नाता रहे है और अब या तो भगवान् को प्यारे हो गए या फिर सेवानिवृत हो गए है । कांग्रेस पार्टी ने परिवार वाद को नए कलेवर में पेश किया है और दुर्भाग्य इस देश का की जनता इसे स्वीकार भी कर रही है । पर दोस्तों एक कहावत भी है की काठ की हांड़ी बार बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती वो तो सिर्फ एक बार ही चढ़ती है , बात करे भारतीय जनता पार्टी की वंहा आपको राजनीति करने के लिए किसी नाता के परिवार से होना जरुरी नहीं है वंहा तो आवश्यकता है सिर्फ इमानदारी से काम करने वाले युवा लोगो की । जिनके दिल में माँ भारती के लिए सामान हो ... भारतीय जनता पार्टी देखा जाये तो आज भी परिवारवाद के इस डांस से बची हुई है । में हिन्दुस्तान के युवा लोगो से कहना चाहता हूँ की दोस्तों अगर राजनीति करनी है और आपके परिवार के लोग पोलिटिक्स में नहीं है तो भारतीये जनता पार्टी से सही विकल्प और कोई नहीं है । आज वर्तमान युवा लोगो की इस सरकार में आम आदमी का जीना दुस्वार हो गया है महंगाई किस कदर बढ़ रही है ... चीनी ५० रु किलो देशी घी ४०० रु , आलू २० रो,किलो महंगी चीजो की लिस्ट बहुत लम्बी है यह तो उदहारण स्वरुप लिखे है। पर आपलोग कहोगे की इनसे युवा नेतृत्वा का क्या दोष यंहा भी में एक बात कहना चाहूँगा की "जिनकी न फटे बिवं वो की अजाने पीर पराई " यह सब सोने के थाली में भोजन करने वाले लोगो की सरकार है जिसमे चांदी के गिलास में पाणी पिने वाले युवराज सामिल है उन्हें क्या पता की आम आदमी किस मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालता है । जय हो कांग्रेस के युवा नेतृत्वा की जय हो
Sunday, August 2, 2009
भारतीय शिक्षा पद्दति और राष्ट्रवाद
भारत एक प्राचीन राष्ट्र है और उतनी ही समृद्ध यंहा की संस्कृति । प्राचीन काल में तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय में पुरी दुनिया के लोग अध्यन कराने आते थे । और यंहा का साहित्य भी बहुत ही समृद्ध रहा है या यूँ कहे की है भी तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी । मुग़ल आक्रमणकारियों ने सबसे पहले यंहा की सांस्कृतिक और शेक्षणिक सम्पति को नष्ट कराने का कार्य किया । कहा जाता है की मुगलों ने तक्षशिला और नालंदा विश्व विद्यालयों के पुश्ताकाल्यो को जलाया तो वो लगातार छः माह तक जलते रहे । उस समय की शिक्षा थी राष्ट्रवाद और रोजगार पर आधारित । मेरा यंहा कहने से तत्प्रिया यह नही है की उस काल में हमारे राष्ट्र के साथ क्या हुआ और क्या नही हुआ । आज में यंहा जो कहना चाह रहा हूँ वो है की आज की शिक्षा पद्दति से हमे नही तो रोजगार उपलब्ध होता है और नही राष्ट्रीय गोरव का । हमारी शिक्षा पद्दति मेकाले की शिक्षा पद्दति है । जब हम स्कूल में पढ़ते थे तो हमारे सामाजिक की किताबो में जो पाठ हुआ करते थे उनमे से एक पाठ का नाम था अकबर महान , में पूछना चाहता हूँ की उस बाल मन को हमे यह पढाना चाहिए की अकबर महान ? वो बाल मन तो अकबर को महान समझेगा और महाराणा प्रताप को दोषी । क्योंकि हम लोगों ने अकबर को महान बताया है और महान के सामने युध्ध ककरने वाला दोषी ही होगा । यह तो मेने एक छोटा सा उदहारण पेश किया है । हमारी शिक्षा पद्दति भारतीय होनी चाहिए । हमे हमारे बच्चो को अकबर की जगह महाराणा प्रताप की महानता के पाठ पढाने चाहिए जिसने अपनी जन्म भूमि और अपने लोगो के लिए राज पट छोड़ दिया और अत्याछ्री अकबर की आधीनता स्वीकार नही की और संघर्ष किया । आज की शिक्षा पद्दति हमे गुलामी के पाठ पढाती है । हमारी मानशिकता भी गुलाम लीगों की और हमे क्लेर्क बनाने वाली इस शिक्षा पद्दति को मजबूत मानशिकता के साथ हम लोगो को बदलना चाहिए ................ । तुष्टि करण को राष्ट्र हित में हम लोगो को छोड़ना ही पड़ेगा । वरना इस राष्ट्र के यह नो जवान नो जवानों की खाल में अंग्रेजो की गुलाम शिक्षा पद्दति से शिक्षित गुलाम ही इस देश के कारण धार होंगे । राष्ट्र के हित में हम सब को अपने छदम स्वार्थो की बलि देनी ही होगी ...... । । हम सब को गर्व होना चाहिए की हम महाराणा प्रताप ,शिवाजी , तात्या टोपे , सुभाष चंद्र बॉस ,भगत सिंह जैसे वीरो की इस धरती पर पैदा हुए है जिन्होंने सर तो कटा लिए लेकिन कभी सर झुकाया नही ....... ।
Saturday, July 11, 2009
आज का युवा और राजनीतिक पार्टिया
भारत की राजनीति में आजकल एक बहुत ही दमदार सगुफा चल रहा है । हर राजनीतिक पार्टी युवा नेतृत्व को आगे लाने की बात कर रहा है । इस मामले में राहुल गाँधी को आगे कर के कांग्रेस में इस सगुफे को पुरे हिन्दुस्तान में बहुत आसानी से भुना लिया और भारतीय जनता पार्टी पीछे रही । पर देखा जाए तो कांग्रेस में अपने युवा नेतृत्वा के फार्मूले की सचाई तो यह है की कांग्रेस तो एक प्रकार से अनुकम्पा नियुक्ति दे रही है । उन्ही नेता पुत्रो या पुत्रियों को आगे कर रही है जिनके माता पिता पहले से कांग्रेस या राजीनीति में थे । कोई अपनी मेहनत से जनता के बीचमें रहकर जनता के लिए काम करने वाले युवा नेताओं को आगे नही किया है । इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ज्यादा ठीक है उसमे ऐसी बात नही है कोई भी युवा कार्यकर्ता अपनी मेहनत के बलबूते पर आगे बढ़ सकता है कांग्रेस का यंगिस्तान एक प्रकार से दिखावा है और अनुकम्पा नियुक्ति है । जबकि भारतीय जनता पार्टी में निश्चित रूप से कांग्रेस से कम युवा आगे आए है पर यह सही है जो आए है वो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी मेहनत से आगे आए है । एक बात तो तय है की वास्तव में अगर युवा लोगो को इस देश में इस राज्य में नेतृत्वा करना है तो उनको भारतीय जनता पार्टी से अच्छा कोई विकल्प नही है क्योंकि कांग्रेस में नेतृत्वा कराने के लिए किसी नेता की संतान होना जरुरी है .....
Friday, July 3, 2009
समलैंगिक रिश्तो को कानूनी मान्यता ? हम भारतीये है ?
दिल्ली हाई कार्ट के द्वि सदस्यों ने कल अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में समलैंगिक रिश्तो को कानूनी मान्यता यह कहते हुए देदी की यह धारा ३७७ संविधान के अनुछेध १४ ,२१, व १५ का अतिक्रमण है । तथा व्यस्क व्यक्ति अपनी इच्छा से समलैंगिक रिश्ते रख सकता है । समलैंगिंक रिश्ते मानशिक रूप से विकृत व्यक्तियों का रोग है । और इस रोग को फैलाने की इजाजत भारतीये समाज में तो कदापि नही मिलनी चाहिए । भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विराशत है और विश्व के सभी राष्ट्र भारतीये संस्कृति से प्रेरणा लेते है । हजारो विदेशी शोधकर्ता हिंदुस्तान की इस पवन धरा भारतीये संस्कृति पर शोध करने आते है । क्या हम मानसिक रूप से विकृत पाश्चात्य सभ्यता को अपनाने जा रहे है । अगर इन संबंधो को व्यक्तिगत स्वतंत्रता मानते हुए न्यायालय ने इन संबंधो को मान्यता दी है तो फिर तो इच्छा मृत्यु को खुदखुशी को भी मान्यता देनी चाहिए क्योंकि उसमे भी व्यक्ति अपनी इच्छा से ही मौत को प्राप्त करना चाहता है । हिंदुस्तान में ऐसे फालतू और विकृत मानसिकता के पोषक काननों को मान्यता देना भी किसी आत्महत्या से कम नही है । मुरली मनोहर जोशी ने बहुत सही बात कही है "दो न्यायाधीश भारतीये संस्कृति का भाग्य निर्धारित नही कर सकते "इसी प्रकार धर्मो के नेताओं ने इस निर्णय की कड़े शब्दों में भर्तसना की है । इनमे जमा मस्जिद के इमाम ,मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ,इसाई धर्म के धर्म गुरु डोमोनिक इनामुल आदि ने ........ । में पुनः कहता हूँ की ऐसे संबंधो की हिंदुस्तान की धरा में कोई जरुरत नही है इसके लिए तो और भी सख्त कानून होना चाहिए । यह अपराध की श्रेणी में था , है और रहेगा ॥
Saturday, June 27, 2009
आज के युग में टेलीविजन की भूमिका
टेलीविजन आज हमारे रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल हो गया है । बिजली पानी खाना इसी प्रकार टेलीविजन भी आज के मनुष्य की अहम् जरुरत बन गया है । हर मध्यम वर्गीय परिवार में आज एक नही बल्कि घर में जितने कमरे है उतने ही टेलीविजन मिलेंगे । अगर देखा जाए तो यह आज के युग की एक महत्वपूरण आवश्यकता है । टेलीविजन के कारण ही आज हम कंही की भी ख़बर को घर बेठे जान सकते है । ज्ञान वर्धन के हिसाब से तो यह ठीक है और हमारा मनोरंजन भी करता है । ज्ञान वर्धन और शुद्ध मनोरंजन तक तो भूमिका ठीक है । पर शुद्ध मनोरंजन के अलावा सांस्कृतिक प्रदुषण भी टेलीविजन के जरिये हमारे घरो में पंहुच चुका है । और भारतीये समाज के ताने बाने को तोड़ने का काम सबसे ज्यादा किसी व्यक्ति विशेष ने किया है तो उसका नाम है एकता कपूर । एकता कपूर के धारावाहिकों में आप देखते है की एक ही महिला के उसी घर में चार चार बार विवाह हो जाते है । औरत के विकृत रूप को बहुत ही सुंदर साड़ी और मेक उप में उसको बहुत ही सुंदर बना कर पेश किया जाता है । और दिखाया जाता है की किस प्रकार उअरत पर सदियों से जुल्म हो रहा है और उस ज़ुल्म को इन धारावाहिकों के मध्यम से सिर्फ़ और सिर्फ़ एकता कपूर के धारावाहिक देखने वाली महिलाए ही ज़ुल्म काठीक कर सकती है । इन धारावाहिकों को देखने से एक बात तो हमारे समाज में बहुत ही मजबूती से फैली है की हमारे इस हिन्दुस्तानी समाज में नई नई शादिया बहुत टूट रही है । कोई दहेज़ के नाम पर तो कोई महिला प्रताड़ना के नाम पर । साथ ही कुछ विदेशी चॅनल भी सांस्कृतिक प्रदुषण फैलाने में कमी नही छोड़ रहे है । आज हमारे समाज को सुधारने के लिए टेलीविजन और सिनेमा के लिए कोई कठोर कानून बनाना ही चाहिए । वरना यह आग कब हमारे घरो को जला कर रख कर देगी और हमे पता ही नही चलेगा क्योंकि हम तो सास भी कभी बहु थी और कसौटी ज़िन्दगी को देखने में व्यस्त रहेंगे । ............. सोचो ......
Friday, May 15, 2009
लेफ्ट राईट है या रोंग ?
कल यानि की १६ मई को इस देश के भाग्य का परिणाम आने वाला है । जनता की अदालत अपना परिणाम तय कर चुकी है कल उस परिणाम की घोसणा हो जायेगी । सरकार भाजपा गठबंधन की बनेगी या कांग्रेस गठबंधन की बनेगी यह तय हो जाएगा । पर एक बात तय है लेफ्ट पार्टिया फिर अपने पुराने साथी कांग्रेस गठबंधन के साथ जायेगी । कहने को तो यह पार्टिया मजदूर और शोषित वर्ग की है । तथा कहते है की यह लेफ्ट पार्टिया एक निश्चित विचारधारा के अनुरूप काम करती है । पर अब इनको सत्ता का स्वाद इनकी जीभ को लग गया है । चार साल सत्ता का सुख भोगने के बाद परमाणु करार के समय यह पार्टिया यु पी ऐ गठ बंधन से अलग हो गयी थी । पर वास्तव में इनका इस गठ बंधन से दूर होने के पीछे जो वास्तविक कारण है वो है इनके क्षेत्र में इनका ख़ुद का कांग्रेस विरोधी होना । और लेफ्ट पार्टिया अपने क्षेत्र में मुख्यतया कांग्रेस के विरोध में जीत कर आती है । और अगर यह गठबंधन में रहते तो इनको सीटो का भी ताल मेल करना पड़ता और कुछ सीट इनको कांग्रेस को देनी पड़ती जो इनको स्वीकार नही होता । तो परमाणु करार इनके लिए एक अच्छा मोका था इस गठ बंधन से दूर होने का और एक अच्छे खिलाड़ी की तरह यह इस देश के लाल खिलाड़ी तुंरत अपना नाता तोड़ लिया । और अगर कांग्रेस इस बार भी अपने गठ बंधन के साथ बड़ा गठ बंधन आता है तो यह लाल झंडे के झंडा बरदार अपना सिफारशी पत्र लिए सबसे आगे मिलेंगे और कहेंगे इस देश को साम्प्रदायिक ताकतों से बचाने के लिए हम यु पी ऐ को समर्थन कर रहे है । इस देश के लोगो को यह भी ध्यान होगा की स्वार्थ सिद्ध कराने में इन लेफ्ट पार्टियों से ज्यादा बड़ा खिलाड़ी कोई नही है । १९६२ में चीन के साथ युद्घ के समय यह इस देश को सांप्रदायिक ताकतों से बचाने वाले लेफ्ट के नेता चीन के सैनिको के लिए तोरण द्वार बना कर स्वागत कराने को आतुर थे । वो तो भला हो इस देश के जांबाज सिपाहियों का जिन्होंने अपनी जान देकर भी भारत माता की लाज बचाई थी । इन लेफ्ट के नेताओं ने तो चीन को अपनी मुक्ति वाहिनी सेना बताया था । यह हमारे देश के लेफ्ट नेता और इनकी विचार धारा । बरस्सत चीन में होती है और छतरी येह तानने वाले इन लेफ्ट का न तो कोई विचार है नही कोई विचारधारा यह तो बस सता के साथ रहना जानते है । .फैसला आपका लेफ्ट राईट है या रोंग
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